जानिए और सीखिये सब कुछ हिन्दी मे.

देशभक्ति की कविताएँ | 10 Best Patriotic Poems in Hindi


Desh Bhakti Ki Kavitayen - Find Great Collection Of Top Patriotic Poems In Hindi, Hindi Poem On Patriotism, Independence Day Poem, Poem On Freedom Fighters In Hindi, आजादी पर कविता, Poem On Nationalism In Hindi And स्वतंत्रता पर कविता.

patriotic desh bhakti poem kavita hindi
Patriotic Desh Bhakti Poem Kavita Hindi

Top Patriotic Desh Bhakti Kavita Poems in Hindi



1. Desh Bhakti Poem In Hindi


हो चित्त जहाँ भय-शून्य, माथ हो उन्नत
हो ज्ञान जहाँ पर मुक्त, खुला यह जग हो
घर की दीवारें बने न कोई कारा
हो जहाँ सत्य ही स्रोत सभी शब्दों का
हो लगन ठीक से ही सब कुछ करने की
हों नहीं रूढ़ियाँ रचती कोई मरुथल


पाये न सूखने इस विवेक की धारा
हो सदा विचारों ,कर्मों की गतो फलती
बातें हों सारी सोची और विचारी
हे पिता मुक्त वह स्वर्ग रचाओ हममें
बस उसी स्वर्ग में जागे देश हमारा.




2. देशभक्ति कविता


ऊँचा खड़ा हिमालय
आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक,
नित सिंधु झूमता है।
गंगा यमुन त्रिवेणी
नदियाँ लहर रही हैं,


जगमग छटा निराली
पग पग छहर रही है।
वह पुण्य भूमि मेरी,
वह स्वर्ण भूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी
वह मातृभूमि मेरी।
झरने अनेक झरते
जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं,
हो मस्त झाड़ियों में।
अमराइयाँ घनी हैं
कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है,



तन मन सँवारती है।
वह धर्मभूमि मेरी,
वह कर्मभूमि मेरी।
वह जन्मभूमि मेरी
वह मातृभूमि मेरी।
जन्मे जहाँ थे रघुपति,
जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई,
वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर,
जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई,
जग को दिया दिखाया।
वह युद्ध–भूमि मेरी,
वह बुद्ध–भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी,
वह जन्मभूमि मेरी।




3. Patriotic Poem In Hindi


केरल से कारगिल घाटी तक
गोहाटी से चौपाटी तक
सारा देश हमारा
जीना हो तो मरना सीखो
गूंज उठे यह नारा


सारा देश हमारा
केरल से कारगिल घाटी तक…
लगता है ताजे कोल्हू पर जमी हुई है काई
लगता है फिर भटक गई है भारत की तरुणाई
कोई चीरो ओ रणधीरो !
ओ जननी के भाग्य लकीरों !
बलिदानों का पुण्य मुहूरत आता नहीं दुबारा
जीना हो तो मरना सीखो गूंज उठे यह नारा
सारा देश हमारा



केरल से कारगिल घाटी तक…
घायल अपना ताजमहल है ,घायल गंगा मैया
टूट रहे हैं तूफानों में नैया और खेवैया
तुम नैया के पाल बदल दो
तूफानों की चाल बदल दो
हर आंधी का उतार हो तुम,तुमने नहीं विचारा
जीना हो तो मरना सीखो गूंज उठे यह नारा
सारा देश हमारा
केरल से कारगिल घाटी तक…
कहीं तुम्हें परवत लड़वा दे ,कहीं लड़ा दे पानी
भाषा के नारों में गम है ,मन की मीठी वाणी
आग दो इन नारों में
इज्ज़त आ गई बाजारों में
कब जागेंगे सोये सूरज ! कब होगा उजियारा
जीना हो तो मरना सीखो गूंज उठे यह नारा
सारा देश हमारा
केरल से कारगिल घाटी तक…
संकट अपना बाल सखा है इसको कंठ लगाओ
क्या बैठे हो न्यारे-न्यारे मिलकर बोझ उठाओ
भाग्य भरोसा कायरता है
कर्मठ देश कहाँ मरता है
सोचो तुमने इतने दिन में कितनी बार हुंकारा
जीना हो तो मरना सीखो गूंज उठे यह नारा
सारा देश हमारा
केरल से कारगिल घाटी तक…

4. Independence Day Poem


तबसे अब में खूब,मचा विकास का जनादेश !
एसी तैसी हुआ ,बहुत बदल गया अपना देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
अंग्रेजी का भाव बढ़ गया ,देश हुआ परदेश !
पगड़ी गमछा लाज लगे,भाए बिलायती भेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
दाल भात पचता नहीं,रोग बर्गर पिज्जा की तैस !
शौखिनी में बड़ी गरीबी,भुगते लाग बाज की रेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
माँ बहन अफसोस हो गयी,बिटिया हुई कलेस!
कलंकओढ़ बहू जल गयी,कलमुही है सन्देश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
गवांर मरे मजदूरी बिन  ,पढे़-लिखे सब शेष !
करता धरता आलस बांचे,बचा न कुछ उद्देश !!
बहुत बदल गया अपना देश !
साधू सन्त व्यापार करे ,चोर उचक्का आदेश !
हुआ निकम्मा अभिेनेता ,जग बांटे सब उपदेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
शाकाहारी खेत खरीहान ,उजाड़ बसे सब ऐस!
मांसाहारी भूख जीभ का, शमशान बना ए द्वेष!!
बहुत बदल गया अपना देश !
चारा सारा राजनीति खा गया,गाये खाए आवेश !
किसान मरे बिन पानी के,न लगा किसीको ठेस !!
बहुत बदल गया अपना देश !
पत्थर खुद पर दे मारे ,कुछ उन्मादी तर्क अन्वेष !
आम बात हुई सहादत ,क्या सरकारी अध्यादेश!!
बहुत बदल गया अपना देश !
बहुत बदल गया अपना देश !

5. Hindi Poem On Patriotism


हम हिन्द के हैं
हिन्द हमारा है
ना फौजी हैं ना नेता
फिरभी हिन्द का दायित्व सम्भाला है
क्योंकि हिन्द हमारा है
किसी ने कहा मुसलमान होने पर गर्व करो
कोई बोल गया गर्व से कहो तुम हिंदु हो
ये नेता बोल बोल कर चले गए,
मग़र उनके बोल जन जन में अंगारों जैसे फूट पड़े,
दोनों विचारों का अभिमान वही टकराता है,
दो सम्प्रदायों का अलगाव वही बहकाता है,
फिर वही कहीं पर ‘अखण्ड भारत’ का अभिलेख
छिन्न भिन्न पड़ जाता है,
इसी अभिलेख को साकार करने में
कितनों ने जीवन गंवाया है
क्योंकि हिन्द हमारा है ।
स्वयं को श्रेष्ठ कहो
मगर क्या हक़ तेरा कि दूजे को नीच कहे,
इस आज़ादी के लिए सबके हैं रक्त बहे,
फिर तू क्यों धर्म का संरक्षक बनता है,
जो है अनादि काल से संचित,
उसको कौन मिटा सकता है?
बनना है तो राष्ट्र का संरक्षक बन,
धर्म तो युगों से कायम है सनातन है,
मगर राष्ट्र ये जो टूट रहा है,
उसकी रक्षा का दायित्व हमारा है ।
क्योंकि हिन्द हमारा है ।
नेताओं राजनेताओं के भाषण ही हमको तोड़ रहे हैं,
धर्म से तो जोड़ रहे हैं, मग़र राष्ट्र से ही तोड़ रहे हैं,
राम रहीम में भेद बताकर घृणा का विष घोल रहे हैं,
राजनीती नहीं ये प्रत्यक्ष देशद्रोह है
कप्टियो को पहचानो !
जो जन गण मन के जयकारों को छोड़ रहे हैं,
ना हिन्दू, ना मुसलमान,
हमें भारतीयों के संगठन का संकल्प उठाना है
क्योंकि हिन्द हमारा है ।
एकेश्वरवादी यहां बोली से प्रहार करते हैं,
नास्तिक हैं वो जो लोगो में घृणा का संचार करते हैं,
धार्मिक इतिहास बताते फिरते हैं,
और राष्टीय भविष्य को बाधित करते हैं,
ये मानव भक्षी हैं जो पंथ काज से सबको छलते हैं।
हर तरफ सामाजिक द्वेष का सृजन हो रहा है,
ऐ हिन्द! अब तेरा पतन हो रहा है ।
हिन्द का पतन है हम सबका अंत,
क्योकि हिन्द हमारा है ।
आज यहां संस्कृतियों में भेद बताये जाते हैं,
कल हम सांस्कृतिक मेल से जाने जाते थे,
पग पग में एकता को दर्शाते थे,
ये धरम करम का बीड़ा उठाये कहाँ फंसे हैं?
हम तो भारत के भाग्यविधाता थे ।
चलो फिर शुभ नाम से जागे
और फिर शुभ आशीष मांगे
फिर जयगाथा दोहराएं
क्योकि हिन्द हमारा है
इसकी रक्षा का दायित्व हमारा है ।

6. Poem On Freedom Fighters In Hindi


इतने व्यस्त हो गए तुम, कि तुम्हारा देशप्रेम साल में 2 बार जगता है
उन सैनिकों के बारे में सोचो, जिनके जीवन का पल-पल देश के लिए लगता है
कोई देश के लिए शान से मरता है………….
और एक तुम हो, जिसे देश के लिए जीना भी मुश्किल लगता है ?
On field Players और On Screen Heroes आदर्श बन गए हैं तुम्हारे
उन लोगों को तुम याद तक नहीं करते, जो Real Life में Heroes हैं
जरा सोचो इन खोखले Role Models ने तुम्हें क्या दिया है अबतक ?
तुम अपने आदर्श बदल लो, इससे पहले कि औंधे मुँह गिरो तुमपार्टी विरोधियों के विरुद्ध डटकर खड़े हो जाते हो तुम
राष्ट्र विरोधियों के विरुद्ध क्यों नहीं आवाज उठाते हो तुम ?
राजनीति, सत्ता सुख पाने का जरिया है जिनके लिए उन्हें क्यों पूजते हो तुम ?
इससे पहले कि देर हो जाए, राष्ट्रनीति को राजनीति का विकल्प बना लो तुम
न एक शिक्षा नीति, न समान नागरिकता नीति
ये तो है अंग्रेजों की बांटों और राज करो नीति
क्यों किसी और से बदलाव किसी उम्मीद करते हो तुम……
जब खुद देश के लिए……. कुछ नहीं करते हो तुम ? ? ?
मैं भारत माता हूँ तुम्हारी…. मैं आज भी रो रही हूँ
क्योंकि तुम आज भी मोह की नींद में सो रहे हो
हो सके तो, अब भी जाग जाओ तुम……..
इससे पहले कि सब कुछ खत्म हो जाए, खुद को पहचान जाओ तुम.

7.  Short Patriotic Poems In Hindi


जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है…
जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है……
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है….
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है………..
जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है…..
जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है…………
जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है……
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है……………..

8. आजादी पर कविता


मेरा यह मानना है
मेरा भारत सब दशों से महान है।
नहीं है ऐसा कोई अन्य देश,
युगों बीतने पर भी वैसा ही है परिवेश,
विभिन्नता में एकता के लिए, प्रसिद्ध है हर प्रदेश,
प्रेम, अहिंसा, भाईचारे का जो है देता संदेश।
मेरा यह मानना है
मेरा भारत सब देशों से महान है।
ऋषि-मुनियों की जो है तपोभूमि,
कई नदियों से भरी है ये पुण्य भूमि,
प्रकृति का है मस्त नजारा यहाँ,
छोड़ इसे जाए हम और अब कहाँ
मेरा यह मानना है
मेरा भारत सब देशों से महान है,
जाति, धर्म का है जहाँ अनूठा संगम,
देशभक्ति की लहर में, भूल जाते सब गम,
देश के लिए मर मिटने को सब है तैयार,
अरे दुनिया वालों, हम है बहुत होशियार,
न छेड़ो हमें, कासर नहीं है हम खबरदार,
अपनी माँ को बचाने, लेगें हम भी हथियार।
मेरा यह मानना है
मेरा भारत सब देशों से महान है..!!

9. Poem On Nationalism In Hindi


अभी-अभी बम के धमाको़ से
चीख़ उठा है शहर
बच्चे, बूढे,जवान
खून से लथपथ
अनगिनत लाशों का ढेर
इस हृदय विदारक वारदात की
कहानी कह रहा है

ओह!
यह कैसी आजा़दी है
जो घोल रही है
मेरे और तुम्हारे बीच
खौ़फ, आग और विष का धुआँ?
हमारे होठों पे थिरकती हंसी को
समेटकर
दुबक गई है
किसी देशद्रोही की जेब में

और हम
चुपचाप देख रहे हैं
अपने सपनों को
अपने महलों को
अपनी आकांक्षाओं को
बारूद में जलकर
राख़ में बदलते हुए..!!

10. स्वतंत्रता पर कविता


हरी नीली लाल पीली
बड़ी बड़ी तेज़ रफ्तार मोटरें
और उनके बीच दबा,
सहमा, डरा सा
आम आदमी

हरे भरे लहराते बड़े बड़े
पेडो के नीचे बिखरी पन्निया
बारिश की प्रदुषण धुली बूँदें
आँखों से बरसती

सड़क पर चाय के ठेले पर
वही बुढ़िया और
चाय पहुचता
वही छोटू

स्कूल से निकलता अल्हड, मस्त
किल्कारिया भरता बचपन
और पास ही सड़क पर
भीख मांगते नन्हे,
असमय बड़े हो चुके
छोटे बच्चे

पाँच सितारा अस्पताल का
उद्घाटन करते प्रधान मंत्री
की तस्वीर को घूरती
सरकारी अस्पताल में
बिना इलाज मरे शिशु की लाश

और इन सबको
कर उपेक्षित
विकास के दावो की होर्डिंग निहारता मैं
मन में दृढ़ करता चलता विश्वास
की हाँ 2020 में
हम विकसित हो ही जाएँगे